गुरुवार, 9 अक्टूबर 2014

बुधवार, 8 अक्टूबर 2014

shaayar

दर्द का सैलाब शायर, ख़ुशी का आगाज शायर,
जो नहीं सोचा किसी ने, उसकी भी आवाज़ शायर।

डॉ अ कीर्तिवर्धन

sharad poornimaa

शरद पूर्णिमा --

शरद पूर्णिमा-शरद ऋतु का, करती है आह्वान,
लिए कलाएँ सौलह नभ में, बता रहे श्रीमान।
बाँट रहे हैं शीतलता को, आज गगन से मामा,
मधुर चाँदनी करती जग में, चन्दा  गुणगान।

डॉ अ कीर्तिवर्धन

samvaad ka mahatv

संवाद

संवाद का महत्त्व बताते, एक दूजे को साथी,
अन्धकार को दूर भगाते, जब मिलते दीया-बाती।
प्रेम पुष्प खिल जाते हैं, निर्जन में भी देखो,
विराने में पिया मिलन को, जब प्रेयसी आती।

डॉ अ कीर्तिवर्धन

samvaad

संवाद

संवादों  से अक्सर देखा, घाव बहुत भर जाते,
शिकवे और शिकायत भी, संवादों से मिट जाते।
चलो करें फिर बातें मीठी, पिछली बात भुलाकर,
मीठी बातों से अक्सर, टूटे दिल भी मिल जाते।

डॉ अ कीर्तिवर्धन

शनिवार, 17 दिसंबर 2011

samman samachar

मुज़फ्फरनगर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अ कीर्तिवर्धन को उनके साहित्यक योगदान एवं हिंदी की सेवा के लिए 'विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ,भागलपुर,बिहार' के १६वे राष्ट्रीय अधिवेशन मे 'विद्यासागर '(डी लिट) की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया|
श्री राम नाम सेवा आश्रम,मौन तीर्थ,गंगा घाट,उज्जैन (मध्य प्रदेश) मे आयोजित विद्यापीठ के १६वे महाधिवेशन मे स्थानीय नागरिकों,पत्रकारों,समाजसेवियों,गुरुकुल के विद्यार्थियों के अलावा देश के कोने कोने से आये 150 से अधिक साहित्यकारों ऩे भाग लिया|दो दिन तक चले इस महाधिवेशन मे मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के खनन मंत्री श्री मालू जी रहे,अध्यक्षता जाने माने साहित्यकार डॉ रामनिवास मानव ऩे की,मंचासीन रहे डॉ तेज नारायण कुशवाहा,कुलपति,डॉ अमर सिंह वधान,सरदार जोबन सिंह ,डॉ देवेंदर नाथ साह तथा सञ्चालन किया डॉ प्रेम चंद पाण्डेय ऩे|
विदित हो कि डॉ अ कीर्तिवर्धन को (मध्य प्रदेश)की साहित्यिक -सांस्कृतिक संस्था 'कादंबरी द्वारा उनकी श्रेष्ठ निबंध कृति 'चिंतन बिंदु' के लिए स्वर्गीय ब्रहम कुमार प्रफुल्ल सम्मान से अलंकृत किया गया जिसके अंतर्गत अंगवस्त्रम,प्रशस्ति पत्र के साथ २१००/ कि सम्मान राशी भी प्रदान कि गयी थी|
डॉ अ कीर्तिवर्धन कि अब तक ७ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं|जतन से ओढ़ी चदरिया' बहुचर्चित रही जो कि बुजुर्गों कि समस्याओं पर केन्द्रित है|डॉ अ कीर्तिवर्धन पर 'कल्पान्त' पत्रिका ऩे अपना विशेषांक 'साहित्य का कीर्तिवर्धन' प्रकाशित कर उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर व्यापक प्रकाश डाला है|कीर्ति वर्धन जी कि अनेक रचनाओं का उर्दू,तमिल,नेपाली ,अंगिका,अंग्रेजी मैथिली मे अनुवाद व प्रकाशन भी हो चुका है|डॉ कीर्तिवर्धन को अब तक देश कि अनेक संस्थाओं से ५० से अधिक सम्मान मिल चुके हैं|
आप बहुप्रकषित एवं बहु पठनीय लेखक के रूप मे देश विदेश मे जाने जाते हैं तथा इन्टरनेट पर भी चर्चित हैं|हम आपके सुखद भविष्य कि मंगलकामना करते हैं|
रमेश चंद गह्तोरी,
नैनीताल बैंक
जाग्रति एन्क्लेव,विकास मार्ग
दिल्ली-92

बुधवार, 9 नवंबर 2011

bazarvad

बाजारवाद --
मैंने कहा
भारतीय संस्कृति मे
बेटी के घर का खाना
उचित नहीं माना जाता,
हमारी परम्परा
बहन ,बेटी को देने की है
उनसे कुछ भी लेने की नहीं|

लोगों ऩे मुझे पढ़ा,सुना और
अतीत की दिवार पर चस्पा कर दिया,
मुझे भारी जवानी मे
बूढ़ा करार दे दिया गया|
बाजारवाद के इस दौर मे
सभ्यता और संस्कृति के
शाश्वत नियमों का उल्लंघन,
अंतहीन,प्रयोजन रहित
बहस करना
वर्तमान बता दिया|
और
एक नई बहस को जन्म दिया
कि नारी
मात्र वस्तु है,भोग्य है
तथा
उसे विज्ञापन बना दिया,
घर,दफ्तर से
दिवार पर लगे पोस्टर तक|
और नारी खुश हो गई
पैसों कि चमक मे|
शायद
इन आधुनिक बाजारवादी लोगों के लिए
कल बहन और बेटी भी
वस्तु / विज्ञापन
या भोग्य बन जायेंगी
यही इनका भविष्य होगा|
और हम
काल के गर्त मे समाकर
प्राचीन असभ्य युग मे
वापस आ जायेंगे |

सच ही तो है
इतिहास स्वयं को दोहराता है |
स्रष्टि के विकास क्रम मे
मनुष्य नंगा रहता था,
आज हम पुनः
बाजारवाद की दौड़ मे
सभ्यता को छोड़कर
नग्नता की और बढ़ रहे हैं,
मन से भी और तन से भी |
प्राचीन कबीलाई संस्कृति को
पुनः अपना रहे हैं,
जातिवाद,क्षेत्रवाद व धर्मवाद के
नए कबीले
तैयार किये जा रहे हैं|

असभ्य मानव
अज्ञानवश पशुओं को खाता था
आज बाजारवाद मे
प्रायोजित तरीकों से
पशु-पक्षियों को
खादय बताया जा रहा है,
जिसके कारण
अनेक प्रजातियाँ लुप्त हो गयी
कुछ होने के कगार पर हैं,
मगर हम सभ्य हैं,
बाज़ार की भाषा मे
विकास कर रहे हैं,
जंगलों को काटकर
मकान तथा
अस्त्र शस्त्र निर्माण कर रहे हैं|
अब हैजे या प्लेग जैसी
बीमारी की जरुरत नहीं,
सिर्फ एक बम ही काफी है
लाखों लोग नींद मे सो जायेंगे,
उनके संसाधनों पर
हम कब्ज़ा जमायेंगे|

यही तो होता था,
कबीलों मे भी
जिसने जीता
स्त्री,पुरुष,धन संपत्ति
सब उसकी
और आज भी यही होता है
जंगल के राजा
शेर के व्यवहार मे
बंदरों के संसार मे,
और
इन आधुनिकों के
उन्मुक्त विचार मे,घर,व्यापार मे|

हम
सुनहरे कल की और बढ़ रहे हैं,
वह सुनहरा कल
जिसका आधार
बीता हुआ कल है,
जिसका वर्तमान
लंगड़ा व अँधा है,
जिसका भविष्य
अंधकारमय है,
और
जो स्थिर होना चाहता है
बाजारवाद के
खोखले कन्धों पर |

तमसों माँ ज्योतिर्गमय |

डॉ अ कीर्तिवर्धन
9911323732

शनिवार, 5 नवंबर 2011

sapana

सपना ---
लंगड़े की बैशाखी,बच्चे का खिलौना,
रेल आई -रेल आई,लेकर दौड़ा छोना |
सुख की परिभाषा उस बच्चे से पूछो,
ना खाने को रोटी,ना सोने का बिछोना|
खेलता है फिर भी,रुखी रोटी खा,
मांगता नहीं वह कार या खिलौना|
देखा है मैंने उसको सपने सजाते,
खुले गगन तले चाहता है वह सोना|
धरती से अम्बर उसकी सीमाएं हैं,
देखता है सबको रोटी का वह सपना|

डॉ अ कीर्तिवर्धन
9911323732

रविवार, 31 जुलाई 2011

lokarpan jatan se odhi chadaria

"जतन से ओढ़ी चदरिया " तथा कल्पान्त पत्रिका के विशेषांक "साहित्य का कीर्तिवर्धन" का लोकार्पण
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दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मलेन द्वारा डॉ ए. कीर्तिवर्धन की बुजुर्गों की दशा एवं दिशा पर केन्द्रित ग्रन्थ "जतन से ओढ़ी चदरिया" तथा साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका 'कल्पान्त' के विशेषांक "साहित्य का कीर्ति वर्धन "का लोकार्पण हिंदी भवन मे सुप्रसिद्ध समाज सेविका ,वरिष्ठ नागरिक केसरी कल्ब की संस्थापिका श्रीमती किरण चोपड़ा द्वारा किया गया| कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ महेश शर्मा,पूर्व महापौर एवं अध्यक्ष दिल्ली हिंदी साहित्या सम्मलेन ऩे की|मुख्य वक्ता के रूप मे आकाशवाणी से कार्यक्रम अधिकारी डॉ हरी सिंह पाल,श्रीमती इंदिरा मोहन ,महामंत्री दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मलेन तथा डॉ रामगोपाल वर्मा ,दिल्ली पब्लिक स्कूल उपस्थित थे|कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ रवि शर्मा ऩे किया|
कार्य क्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन से किया गया| सभी अथितियों को पुष्प गुच्छ से श्रीमती रजनी अग्रवाल,डॉ सुधा शर्मा,सुरम्या,वैभव वर्धन आदि ऩे सम्मानित किया|तत्पश्चात श्री महेश शर्मा ऩे डॉ अ कीर्तिवर्धन के व्यक्तित्व ,तथा साहित्यक योगदान पर प्रकाश डाला| श्री शर्मा जी ऩे कहा कि पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव और एकल परिवार के कारण समाज मे वरिष्ठ नागरिकों कि समस्याएँ दिन प्रतिदिन बढाती जा रही हैं|इस पुस्तक में डॉ ए कीर्तिवर्धन ऩे इस समस्या को बखूबी उजागर किया है|उन्होंने कहा कि माता पिता संतान के लिए सदैव पूज्यनीय हैं|यही हमारी संस्कृति एवं परंपरा कि देन है|
मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए श्रीमती किरण चोपड़ा ऩे कहा कि बुजुर्ग होना सौभाग्य कि बात है|डॉ ए कीर्तिवर्धन ऩे बुजुर्गों कि चिंताओं को समाज के सम्मुख लेन का स्तुत्य प्रयास किया है| यह ऐसा ग्रन्थ है जो समस्याओं का निदान भी बताता है| प्रत्येक आयु वर्ग के लिए मार्ग दर्शक के रूप में इसका अति महत्व है|इस ग्रन्थ कि प्रतियाँ प्रत्येक पुस्तकालय,तथा प्रत्येक घर में होनी चाहियें|उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि डॉ ए कीर्तिवर्धन से इसे खरीद कर बुजुर्गों तक अवस्य पहुंचाएं|श्रीमती किरण चोपड़ा ऩे वरिष्ठ नागरिक क्लब से भी डॉ ए कीर्तिवर्धन को जुड़ने का आह्वान किया तथा कहा कि कि ग्रन्थ 'जतन से ओढ़ी चदरिया' कि सामग्री को विभिन्न प्रकाशनों के द्वारा भी समाज तक पहुँचाने का प्रयास करेंगी|
वक्ता के रूप में डॉ हरी सिंह पाल ऩे डॉ कीर्तिवर्धन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण बताया और कहा कि इन्ही संवेदनाओं के कारण यह ग्रन्थ आ पाया जिसके प्रकाशन में सम्पूर्ण व्यय स्वयम डॉ ए कीर्तिवर्धन द्वारा किया गया|उन्होंने जतन से ओढ़ी चदरिया के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर प्रकाश डाला|ग्रन्थ में मौजूद सूक्तियों तथा लघु प्रसंगों को भी उन्होंने महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह ग्रन्थ रामायण कि तरह घर में रखने तथा पढ़ने के लिए उत्तम है| इससे आज के भटकते समाज को दिशा मिलेगी|
इस बीच शिकागो से कीर्तिवर्धन जी की प्रशंशिका गुड्डों दादी के मोबाइल सन्देश से पूरा हॉल तालियों की गडगडाहट से भर गया|
श्रीमती इंदिरा मोहन ऩे पुस्तक में समाहित लेखों,सम्पादकीय तथा काव्य खंड के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कि विद्वानों ऩे सच्चे अर्थों में कर्त्तव्य बोध कराया है|श्रीमती मोहन ऩे कहा कि डॉ ए कीर्तिवर्धन मानवीय मूल्य एवं विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं| दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मलेन उनकी सराहना करता है|जतन से ओढ़ी चदरिया तथा कल्पान्त के विशेषांक का लोकार्पण संस्था के बैनर टले कर हम गौरवान्वित हुए हैं| उन्होंने कहा कि इस ग्रन्थ का एक -एक शब्द प्रत्येक पीढ़ी के लिए मार्ग दर्शक कि तरह है| इसके पढ़ने तथा इस पर अमल कराने से एकल परिवारों कि स्थापना होगी|
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए डॉ रामगोपाल वर्मा ऩे कहा कि डॉ रवि शर्मा तथा कल्पान्त के संस्थापक संपादक डॉ मुरारी लाल त्यागी ऩे डॉ ए कीर्तिवर्धन पर 'साहित्य का कीर्तिवर्धन 'निकाल कर सही व्यक्ति का चयन किया है|वास्तव में डॉ कीर्तिवर्धन इसके लिए सर्वथा उपयुक्त व्यक्ति हैं|कल्पान्त में देश के कोने कोने से आये उनके मित्रों,साहित्यकारों तथा पाठकों के विचार उनकी लोकप्रियता का प्रतीक हैं|कीर्तिवर्धन जी लगभग १७ राज्यों से प्रकाशित होने वाले ३५० से अधिक पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं|वह बहुत मिलनसार,मानवीय तथा चिन्तक हैं|
डॉ रवि शर्मा ऩे बताया कि डॉ कीर्तिवर्धन की अब तक ७ पुस्तकें आ चुकी हैं|उनकी रचनाएँ सभी वर्ग के पाठकों के द्वारा सराही जाती हैं| उनकी लेखनी विभिन्न विषयों पर चलती है जिसमे दलित चेतना,नारी मुक्ति,आतंकवाद जैसे विषय हैं तो बालमन का ससक्त चित्रण भी दिखाई देता है| आपकी कुछ कविताओं का चयन महाराष्ट्र में नए पाठ्यक्रम में चयन के लिए किया गया है तथा 'सुबह सवेरे' बिहार, उत्तरप्रदेश तथा उत्तराखंड के अनेक विद्यालयों में पढाई जाती है|
श्रीमती सुधा शर्मा तथा सुरम्या शर्मा द्वारा डॉ ए कीर्तिवर्धन की कविताओं का पाठ किया गया|
डॉ ए कीर्तिवर्धन ऩे अपने वक्तव्य में अपने लेखन का श्रेय अपने पाठकों ,विभिन्न पत्र पत्रिकाओं के संपादकों ,अपनी पत्नी तथा पुत्र को दिया|उन्होंने अपने बैंक के साथियों का भी धन्यवाद् किया जिनका सहयोग उन्हें प्रतिदिन मिलता है|दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मलेन ,श्री महेश चंद शर्मा, श्रीमती इंदिरा मोहन का आभार व्यक्त करते हुए कहा की सम्मलेन के इस प्रकार लेखकों को प्रोत्साहित कराने के प्रयास अनुकरणीय हैं| श्रीमती किरण चोपड़ा जी का भी आभार करते हुए कहा की मुझसे जो भी कार्य बुजुर्गों के हित में हो सकेगा ,कराने का प्रयास करूँगा| सभी वक्ताओं ,डॉ रवि शर्मा,डॉ सुधा शर्मा,सुरम्या तथा सम्मलेन में आये सभी अतिथियों के पार्टी भी कृतज्ञता ज्ञापित की|
सम्मलेन के उपाध्यक्ष श्री गौरी शंकर भारद्वाज ऩे सभी का आभार प्रकट किया|इस अवसर पर लाला जय नारायण खंडेलवाल,श्री अरुण बर्मन,श्यामसुंदर गुप्ता,श्री सुरेश खंडेलवाल ,श्री स प सिंह, श्री ॐ प्रकाश,श्री अनमोल,श्री लक्ष्मी नारायण भाटिया ,संपादक जनसंघ वाणी,श्री प्रदीप सलीम संपादक युद्ध भूमि,श्री गोपल क्रिशन मिश्र संपादक संवाद दर्पण,संपादक बिहारी खबर,आकाशवाणी से संवाददाता ,नैनीताल बैंक के सहायक महाप्रबंधक श्री के एस मेहरा,चीफ मेनेजर श्री रमण गुप्ता,वी के महरोत्रा,श्री देश दीपक ,श्री राकेश गुप्ता ,श्री मनोज शर्मा सहित अनेकों बैंक कर्मचारियों ,श्री लालबिहारी लाल,श्री यु एस मिश्र,अनिल चौधरी,भल्ला जी ,मोहन पाण्डेय जैसे अनेकों साहित्य प्रेमियों,डॉ ए कीर्तिवर्धन के परिवार जनों सहित बड़ी संख्या में लोगों ऩे भाग लिया |
लाल बिहारी लाल तथा डॉ रवि शर्मा द्वारा जारी

मंगलवार, 26 जुलाई 2011

invitation

प्रिय मित्र,
२९ जुलाई दिन शुक्रवार को शाम ५ बजे मेरी पुस्तक 'जतन से ओढ़ी चदरिया' तथा कल्पान्त के विशेषांक का लोकार्पण है|आपसे अनुरोध है कि आमंत्रण पत्र पर दिए कार्यक्रम के अनुसार हिंदी भवन मे पधार कर अपनी उपस्थिति से गौरवान्वित करें.
स्थान-हिंदी भवन,राउज एवेन्यू रोड,आई टी ओ ,बल भवन के पास
शाम ४.४५ से
मुख्य अतिथि -श्रीमती किरण चोपड़ा ,संस्थापक वरिस्थ नागरिक केसरी क्लब
विशिष्ट अतिथि -श्री अनिल भारद्वाज,संसदीय सचिव ,दिल्ली सरकार
अध्यक्ष-श्री महेश चन्द्र शर्मा,पूर्व महापोर,अध्यक्ष-दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मलेन
सानिध्य -श्री मुरारी लाल त्यागी,संस्थापक संपादक-कल्पान्त
वक्ता-श्रीमती इंदिरा मोहन,महामंत्री-दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मलेन
डॉ हरी सिंह पाल,कार्यक्रम अधिकारी,आकाशवाणी,दिल्ली
डॉ रामगोपाल वर्मा,दिल्ली पब्लिक स्कूल,आर के पुरम,दिल्ली
कविता पाठ -डॉ सुधा शर्मा,सुरम्या शर्मा
संचालन-डॉ रवि शर्मा ,संयोजक व साहित्य मंत्री,दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मलेन

--
Dr. A.Kirti vardhan

Mobile: 09911323732
Email:
a.kirtivardhan@gmail.com
a.kirtivardhan@rediffmail.com

Read me at:
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शनिवार, 2 जुलाई 2011

शनिवार, 25 जून 2011

mera desh bharat

भारत
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कण-कण में जहाँ शंकर बसते,बूँद-बूँद मे गंगा,
जिसकी विजय गाथा गाता,विश्व विजयी तिरंगा|
सागर जिसके चरण पखारे,और मुकुट हिमालय,
जन-जन में मानवता बसती,हर मन निर्मल,चंगा|
वृक्ष धरा के आभूषण,और रज जहाँ कि चन्दन,
बच्चा-बच्चा राम-कृष्ण सा,बहती ज्ञान कि गंगा|
विश्व को दिशा दिखाती,जिसकी,आज भी वेद ऋचाएं,
कर्मयोग प्रधान बना,गीता का सन्देश है चंगा|
'अहिंसा तथा शांति' मंत्र, जहाँ धर्म के मार्ग,
त्याग कि पराकाष्ठा होती,जिसे कहते 'महावीर'सा नंगा|
भूत-प्रेत और अंध विश्वाश का,देश बताते पश्छिम वाले,
फिर भी हम है विश्व गुरु,अध्यातम सन्देश है चंगा|
डॉ अ कीर्तिवर्धन
०९९११३२३७३२

रविवार, 12 जून 2011

aao papa mere paas

पापा तुम घर कब आओगे?
मम्मी मुझको रोज बताती
चंदामामा भी दिखलाती
क्यों रहते तुम चंदा पास?
नहीं आती क्या मेरी याद?

दादी भी मुझको बहकाती
भगवान् की बात सुनती
खेल रहे तुम उसके साथ
नहीं आती क्या मेरी याद?

पापा तुम जल्दी आ जाओ
वर्ना में खुद आ जाउंगी
भगवान् से बात करुँगी
तुमको घर ले आउंगी.

पा तुम जब घर आओगे
में संग आपके खेलूंगी
खाना खाऊं दूध पीउंगी
कभी नहीं में रोउंगी.

रात को जब मम्मी सोती है
बिस्तर मे वह रोटी है
करती वह तुमसे जब बात
आती मुझको आपकी याद.

डॉ अ कीर्तिवर्धन
09911323732
a.kirtivardhan@gmail.com
a.kirtivardhan@rediffmail.com

गुरुवार, 9 जून 2011

log

लोग

अक्सर हमसे डरते लोग,
महज दिखावा करते लोग|
हम भी यह सब खूब समझते,
चापलूसी क्यों करते लोग|
वो हैं चोरों के सरदार,
कहने से क्यों डरते लोग|
सफ़ेद भेडिये खुले घूमते,
क्यों नहीं उन्हें पकड़ते लोग|
कहते हैं सब बेईमान,
क्यों नहीं उन्हें बदलते लोग|
अबकी बार चुनाव होगा,
फिर से उन्हें चुनेंगे लोग|
लूट रहे जो अपने देश को,
कहते देश भक्त हैं लोग|
जन्म दिया और बड़ा किया
घर के बाहर खड़े क्यों लोग?
मात पिता जीवित भगवान
क्यों नहीं सार समझते लोग?
माँ-बाप कि कदर न करते
मरे हुए से बदतर लोग|
जीवन,मरण,लाभ,यश,हानि
कर्मो का फल कहते लोग|
मानवता कि राह चले जो
अक्सर दुखिया रहते लोग|
भ्रष्ट-बेईमान क्यों कर फूले
बतला दो तुम ज्ञानी लोग |
साँसों कि गिनती है सिमित
बतलाते हैं साधू लोग|
तेरा मेरा करते लड़ते
जीवन व्यर्थ गंवाते लोग|
आज भी हम हैं विश्व गुरु
क्यों नहीं बात समझते लोग?
भारत सदा ज्ञान का केंद्र
कहते हैं दुनिया के लोग|
ज्ञान कि भाषा कहाँ खो गई
ढूंढ रहे हैं ज्ञानी लोग?
अंग्रेजी को महान बताते
मेरे अपने घर के लोग|
सबसे बड़ा बन गया रुपैया
ऐसा कहते ज्यादा लोग|
फिर भी धनी दुखी क्यों रहता
समझाते नहीं सयाने लोग|
देश ऩे हमको दिया है सब कुछ
क्यों नहीं गर्व समझते लोग?
लूट रहे जो अपने देश को
सचमुच बड़े कमीने लोग|
डॉ अ कीर्तिवर्धन
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09911323732

शनिवार, 21 मई 2011

mukhauton ki dunia

मुखौटों कि दुनिया
मुखौटों कि दुनिया मे रहता है आदमी,
मुखौटों पर मुखौटें लगता है आदमी|
बार बार बदलकर देखता है मुखौटा,
फिर नया मुखौटा लगता है आदमी|
मुखौटों के खेल मे माहिर है आदमी,
गिरगिट को भी रंग दिखाता है आदमी|
शैतान भी लगाकर इंसानियत का मुखौटा,
आदमी को छलने को तैयार है आदमी|
मजहब के ठेकेदार भी अब लगाते है मुखौटे
देते हैं पैगाम,बस मरता है आदमी|
लगाने लगे मुखौटे जब देश के नेता,
मुखौटों के जाल मे,फंस गया आदमी|
जाति,धर्म का जब लगाया मुखौटा,
आदमी का दुश्मन बन गया है आदमी|
देखकर नेताओं का मुखौटा अनोखा,
हैरान और परेशान रह गया है आदमी|
कभी भूल जाता है मुखौटा बदलना आदमी
शै और मात मे फंस जाता है आदमी|
मुखौटों के खेल मे इतना उलझ गया आदमी
खुद की ही पहचान भूल गया है आदमी|
डॉ अ कीर्तिवर्धन
9911323732
a.kirtivardhan@gmail.com
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शनिवार, 7 मई 2011

aankh ka pani

आँख का पानी
होने लगा है कम अब आँख का पानी,
छलकता नहीं है अब आँख का पानी|
कम हो गया लिहाज,बुजुर्गों का जब से,
मरने लगा है अब आँख का पानी|
सिमटने लगे हैं जब से नदी,ताल,सरोवर
सूख गया है तब से आँख का पानी|
पर पीड़ा मे बहता था दरिया तूफानी
आता नहीं नजर कतरा ,आँख का पानी|
स्वार्थों कि चर्बी जब आँखों पर छाई
भूल गया बहना,आँख का पानी|
उड़ गई नींद माँ-बाप कि आजकल
उतरा है जब से बच्चों कि आँख का पानी|
फैशन के दौर कि सबसे बुरी खबर
मर गया है औरत कि आँख का पानी|
देख कर नंगे जिस्म और लरजते होंठ
पलकों मे सिमट गया आँख का पानी|
लूटा है जिन्होंने मुल्क का अमन ओ चैन
उतरा हुआ है जिस्म से आँख का पानी|
नेता जो बनते आजकल,भ्रष्ट,बे ईमान हैं
बनने से पहले उतारते आँख का पानी|
डॉ अ कीर्तिवर्धन
09911323732

गुरुवार, 5 मई 2011

shabdon me

-------शब्दों में ------
मैंने शब्दों में
भगवान को देखा
शैतान को देखा
आदमी तो बहुत देखे
पर
इंसान कोई कोई देखा।
इन्ही शब्दों में
मैंने प्यार को देखा
कदम कदम पर अंहकार भी देखा
धर्मात्मा तो बहुत देखे
पर
मानवता की खातिर
मददगार कोई कोई देखा।

इन्ही शब्दों में
मैंने चाह देखी
भगवान् पाने की
बुलंदियों पर जाने की
गिरते हुए भी मैंने बहुत देखे
पर गिरते को उठाने वाला
कोई कोई देखा।
इन्ही शब्दों में
भ्रष्टाचार को महिमा मंडित करते देखा
नारी की नग्नता को प्रदर्शित करते देखा
पर निर्लजता पर चोट करते
कोई कोई देखा।
इन्हीशब्दों में
कामना करता हूँ ईश्वर से
मुझे शक्ति दे
लेखनी मेरी चलती रहे
पर पीडा में लिखती रहे
पाप का भागी मैं बनूँ
यश का भागी ईश्वर रहे.

डॉ अ कीर्तिवर्धन
09911323732
a.kirtivardhan@gmail.com
kirtivardhan.blogspot.com

शनिवार, 30 अप्रैल 2011

mahabharat

महाभारत
एक बार फिर से अभिमन्यु वध हो गया |
युधिष्ठर नैतिकता की दुहाई देते रहे
द्रोपदी का फिर से चीर हरण हो गया.|
अनैतिकता के सामने नैतिकता का
ध्वज फिर तार तार हो गया|
भीष्म के धवल वस्त्र फिर भी न मैले हो सके
सिंहासन की निष्ठा ने उनको फिर बचा लिया|
ध्रतराष्ट्र अंधे हैं गांधारी ने पट्टी बाँधी है
गुरु द्रोण नि: शब्द हैं, सत्ता से उनकी यारी है|
संजय नीति के ज्ञाता हैं, उनको निष्ठां प्यारी है
कर्ण वीर सहन शील बने है दुर्योधन से यारी है|
चक्र व्यूह भेदन के सब नियम बदल गए
अर्जुन और भीम नियमों पर चलते रहे|
दुर्योधन ने नियमों को नया रंग दे दिया
अभिमन्यु का वध कर दुःख प्रकट कर दिया|
शकुनी की कुटिल चालों से
सभी पांडव त्रस्त हैं|
कृष्ण की चालाकियां भी
अब मानो नि: शस्त्र है|

डॉ अ कीर्तिवर्धन
०९९११३२३७३२
kirtivardhan.blogspot,com
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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

samachar

जतन से ओढी चदरिया पर परिच्रर्चा आयोजित
नई दिल्ली- लाल, कला सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना मंच के तत्वाधान में डा. ए. कीर्तिबर्धन द्वारा बुजूर्गो की दशा एवं दिशा पर आधारित,संपादित ग्रन्थ जतन से ओढी चदरिया पर एक परिचर्चा का आयोजन अल्फा शैक्षणिक संस्थान ,स्कूल रोड ,मीठापुर (नियर संतोषी माता मंदिर) ,बदरपुर, नई दिल्ली में आयोजित किया गया । जिसका उदधाट्न स्थानीय निगम पार्षद महेश आवाना एवं श्री राज कुमार अग्रवाल(संपादकः हमारा मेट्रो) द्वारा संयुक्त रुप से किया गया। इसका संचालन बरिष्ठ साहित्यकार डा.ए.कीर्तिवर्धन ऩे किया । इस कार्यक्रम के संयोजक दिल्ली रत्न लाल बिहारी लाल थे| तथा अध्यक्षता डा. के. के. तिवारी ने किया।
इस परिचर्चा में डा. हरिसिंह पाल (निदेशक-प्रसार भारती), प्रो(डा)हरीश अरोडा, प्रो.(डा.)रवि शर्मा,श्री प्रदीप गर्ग पराग (फरीदाबाद),श्री गाफिल स्वामी(अलीगढ),डा. अजय कुमार भटनागर(मुज्जफर नगर),श्री नासाद औरंगावादी(समस्तीपुर,बिहार), दिल्ली रत्न लाल बिहारी लाल,डा. ए.कीर्तिबर्धन (मुज्जफर नगर),श्री प्रकाश लखानी एवं श्री एन.एल.गोसाईं(फरीदाबाद) आदि १६ विद्वानों ने भाग लिया। सभी ने बुजुर्गो की दशा एवं दिशा पर बोलते हुए कहा कि आज के हालात के लिए स्वयं बुजुर्ग ही जिम्मेदार है क्योंकि बालपन में बच्चों पर ध्यान नही देते जिससे उसे सांस्कारिक घुटी नही मिल पाते है पर बच्चों से उम्मीदों को पाल लेना ही सबसे बडी समस्या की जड बनती जा रही है। श्री लाल बिहारी लाल ने कम्युनिकेशन गैप की पीडा को कुछ यूं कहा कि विरासत संभालने में आजकल के बच्चे भी अपने बाप के भी बाप हो गए हैं।
इस अवसर पर डा. आर. कान्त, डा. सत्य प्रकाश पाठक, श्री मनोज गुप्ता, ,श्री के.पी.सिंह कुवंर,श्री राकेश कन्नौजी,श्री धुरेन्द्र राय, श्री बरुण सर, लोक गायिका सीमा तिवारी, सहित अनेक लेखक एवं सामाज सेवी मौयूद थे।अन्त में धन्यवाद ज्ञापन संस्था की डॉ आर कान्त जी द्वारा किया गया|
कार्यक्रम के उपरांत संस्था की और से जलपान की व्यस्था की गई|
सोनू गुप्ता
(अध्यक्ष) 09868163073