खोटा सिक्का
हम खोटे ही सही,सिक्के तो हैं
नहीं चलेंगे कोई बात नहीं
कम से कम तौलने के काम तो आयेंगे.
आपकी जेब मे बजते रहेंगे
कुछ होने का अहसास तो दिलाएंगे.
हमें खोने का भी तुम्हे गम न होगा
हमें फैंकना मारने के काम तो आयेंगे.
हम खोटे सिक्के हैं
खोटे ही सही
वक़्त पर अपने होने का अहसास दिलाएंगे.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
09911323732
रविवार, 6 जून 2010
vo mere hain
वो मेरे हैं
खुली आँखों से देखे हैं
तुने जो सपने
वो मेरे हैं.
उठ रहे तूफ़ान
जो दिले समंदर मे तेरे
वो मेरे हैं.
जरुरी तो नहीं
हर राह से तुम्ही गुजरों
कोई और गुजरा है उसी राह
तेरी चाह मे
देखें हैं कदमों के निशाँ
जो दिले राहों मे
वो मेरे हैं.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
09911323732
खुली आँखों से देखे हैं
तुने जो सपने
वो मेरे हैं.
उठ रहे तूफ़ान
जो दिले समंदर मे तेरे
वो मेरे हैं.
जरुरी तो नहीं
हर राह से तुम्ही गुजरों
कोई और गुजरा है उसी राह
तेरी चाह मे
देखें हैं कदमों के निशाँ
जो दिले राहों मे
वो मेरे हैं.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
09911323732
rashak
रश्क
रश्क करने वाले मेरी ख़ुशी से
मेरे अश्कों का भी दीदार कर
छलकते हैं मेरे आंसू गैरों के गम मे
और बह जाते हैं उनका प्यार देखकर.
जीने कि तमन्ना जिनके दिलों मे
बस खुद का घर परिवार देखकर
मरे हुए हैं वो लोग मेरी नज़र मे
तड़फते नहीं कहीं उजड़ा संसार देखकर.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
09911323732
रश्क करने वाले मेरी ख़ुशी से
मेरे अश्कों का भी दीदार कर
छलकते हैं मेरे आंसू गैरों के गम मे
और बह जाते हैं उनका प्यार देखकर.
जीने कि तमन्ना जिनके दिलों मे
बस खुद का घर परिवार देखकर
मरे हुए हैं वो लोग मेरी नज़र मे
तड़फते नहीं कहीं उजड़ा संसार देखकर.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
09911323732
शनिवार, 5 जून 2010
shabdon me
मैंने शब्दों में
भगवान को देखा
शैतान को देखा
आदमी तोबहुत देखे
पर
इंसान कोई कोई देखा।
इन्ही सब्दों में
मैंने प्यार को देखा
कदम कदम पर अंहकार भी देखा
धर्मात्मा तो बहुत देखे
पर
मानवता की खातिर
मददगार कोई कोई देखा।
इन्ही सब्दों में
मैंने चाह देखी
भगवान् पाने की
बुलंदियों पर जाने की
गिरते हुए भी मैंने बहुत देखे
पर गिरते को उठाने वाला
कोई कोई देखा।
इन्ही शब्दों में
भ्रष्टाचार को महिमा मंडित करते देखा
नारी की नग्नता को प्रदर्शित करते देखा
पर निर्लाजता पर चोट करते
कोई कोई देखा।
इन्हीशब्दों में
कामना करता हूँ इश्वर से
मुझे शक्ति दे
लेखनी मेरी चलती रहे
पर पीडा में लिखती रहे
पाप का भागी में banu
यश का भागी इश्वर रहे.
dr a kirtivardhan
भगवान को देखा
शैतान को देखा
आदमी तोबहुत देखे
पर
इंसान कोई कोई देखा।
इन्ही सब्दों में
मैंने प्यार को देखा
कदम कदम पर अंहकार भी देखा
धर्मात्मा तो बहुत देखे
पर
मानवता की खातिर
मददगार कोई कोई देखा।
इन्ही सब्दों में
मैंने चाह देखी
भगवान् पाने की
बुलंदियों पर जाने की
गिरते हुए भी मैंने बहुत देखे
पर गिरते को उठाने वाला
कोई कोई देखा।
इन्ही शब्दों में
भ्रष्टाचार को महिमा मंडित करते देखा
नारी की नग्नता को प्रदर्शित करते देखा
पर निर्लाजता पर चोट करते
कोई कोई देखा।
इन्हीशब्दों में
कामना करता हूँ इश्वर से
मुझे शक्ति दे
लेखनी मेरी चलती रहे
पर पीडा में लिखती रहे
पाप का भागी में banu
यश का भागी इश्वर रहे.
dr a kirtivardhan
रविवार, 30 मई 2010
mera man
मेरा मन
मैंने सुना
वृक्षों के नवांकुरित पत्तों का कलरव
वृद्ध पत्तों का सिंहनाद
पीत पत्तों का रुदन.
जिसने पुलकित कर डाला
मेरा मन.
विचारों कि उठती तरंग
जीवन का निष्ठुर अंत
हवा का झोंका
पानी मे तरंग
पानी मे झिलमिल
सूरज कि किरण
जीवंत हो उठा
मेरा मन.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
९९११३२३७३२
मैंने सुना
वृक्षों के नवांकुरित पत्तों का कलरव
वृद्ध पत्तों का सिंहनाद
पीत पत्तों का रुदन.
जिसने पुलकित कर डाला
मेरा मन.
विचारों कि उठती तरंग
जीवन का निष्ठुर अंत
हवा का झोंका
पानी मे तरंग
पानी मे झिलमिल
सूरज कि किरण
जीवंत हो उठा
मेरा मन.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
९९११३२३७३२
jakhmon ki dastan
जख्मों कि दास्ताँ
वक़्त ने जख्मों को मेरे
कुछ इस तरह सी दिया है
गर मखमल के गलीचे पर
टाट का पैबंद लगा दिया है.
जख्मों कि दास्ताँ अब
मेरे चेहरे से बयां है
भले ही जिंदगी कि खातिर
मैंने उनको भुला दिया है.
टूट कर जोड़े गए
शीशे के मानिंद
जिंदगी का हर लम्हा
मेरे जख्मों का गवाह है.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
०९९११३२३७३२
वक़्त ने जख्मों को मेरे
कुछ इस तरह सी दिया है
गर मखमल के गलीचे पर
टाट का पैबंद लगा दिया है.
जख्मों कि दास्ताँ अब
मेरे चेहरे से बयां है
भले ही जिंदगी कि खातिर
मैंने उनको भुला दिया है.
टूट कर जोड़े गए
शीशे के मानिंद
जिंदगी का हर लम्हा
मेरे जख्मों का गवाह है.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
०९९११३२३७३२
शनिवार, 29 मई 2010
सपने का मेल
एक कला कौवा
छीन कर ले गया निवाला
उस बच्चे के हाथ से
जो दो दिन से था भूखा.
जिस निवाले को पाने कि खातिर
माँ से भी रूठा था
भाई से लड़ा था
भीख मांगी थी
सड़क पर भी पड़ा था.
कौवे के छिनने से निवाला
बच्चे को
जरा भी गुस्सा नहीं आया
वह अपनी भूख भी भूल गया
बस
कौवे को देखने मे मशगुल रहा.
उसे अच्छा लगा
कौवे का छिनना निवाला
फिर
दीवार पर बैठकर खाना.
उसके लिए यह एक खेल था
शायद
उसके सपनों का मेल था.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
09911323732
एक कला कौवा
छीन कर ले गया निवाला
उस बच्चे के हाथ से
जो दो दिन से था भूखा.
जिस निवाले को पाने कि खातिर
माँ से भी रूठा था
भाई से लड़ा था
भीख मांगी थी
सड़क पर भी पड़ा था.
कौवे के छिनने से निवाला
बच्चे को
जरा भी गुस्सा नहीं आया
वह अपनी भूख भी भूल गया
बस
कौवे को देखने मे मशगुल रहा.
उसे अच्छा लगा
कौवे का छिनना निवाला
फिर
दीवार पर बैठकर खाना.
उसके लिए यह एक खेल था
शायद
उसके सपनों का मेल था.
डॉ अ कीर्तिवर्धन
09911323732
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