सफर के सजदे में: कैसे करें सच का सामना
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dr.a.kirtivardhan
शनिवार, 5 सितंबर 2009
रविवार, 23 अगस्त 2009
समर्पण
समर्पण
कर दीजिये पूर्ण समर्पण अंहकार का
अपने प्रभु के सामने
देखिये फिर कृपा उसकी
क्या मिले संसार मे.
सबसे पहले शान्ति मिलती
फिर मिलता खजाना संतोष का
.जब त्यागी पर निंदा तुमने
प्रभु दोस्ती का संग मिला.
क्या खोया,क्या पाया
समर्पण मे न विचारिये
व्यापार नहीं है प्रभु भक्ति
बस देने का भाव लाइए
डॉ अ किर्तिवर्धन
कर दीजिये पूर्ण समर्पण अंहकार का
अपने प्रभु के सामने
देखिये फिर कृपा उसकी
क्या मिले संसार मे.
सबसे पहले शान्ति मिलती
फिर मिलता खजाना संतोष का
.जब त्यागी पर निंदा तुमने
प्रभु दोस्ती का संग मिला.
क्या खोया,क्या पाया
समर्पण मे न विचारिये
व्यापार नहीं है प्रभु भक्ति
बस देने का भाव लाइए
डॉ अ किर्तिवर्धन
रविवार, 16 अगस्त 2009
शनिवार, 1 अगस्त 2009
मम्मी मुझे बताओ कैसे?
मम्मी मुझे बताओ कैसे?
कैसे आते आम पेड़ पर
और जमीन मे आलू
मम्मी मुझे बताओ कैसे
नाचे कूदे भालू?
कैसे आता चाँद गगन मे
और नीलगगन मे तारे
मम्मी मुझे बताओ कैसे
सूरज लाता भोर उजारे?
मैंने देखा चिडिया को
सुबह सवेरे आती
मम्मी मुझे बताओ कैसे
चिडिया इतना मीठा गाती?
कैसे बादल उडे गगन मे
फिर बरसी वरखा रानी
मम्मी मुझे बताओ कैसे
भीगे नाना नानी?
कैसे पंछी उडे गगन मे
और जमीन पर आते
मम्मी मुझे बताओ कैसे
पर्वत ऊँचे होते जाते?
डॉ अ किर्तिवर्धन
09911323732
कैसे आते आम पेड़ पर
और जमीन मे आलू
मम्मी मुझे बताओ कैसे
नाचे कूदे भालू?
कैसे आता चाँद गगन मे
और नीलगगन मे तारे
मम्मी मुझे बताओ कैसे
सूरज लाता भोर उजारे?
मैंने देखा चिडिया को
सुबह सवेरे आती
मम्मी मुझे बताओ कैसे
चिडिया इतना मीठा गाती?
कैसे बादल उडे गगन मे
फिर बरसी वरखा रानी
मम्मी मुझे बताओ कैसे
भीगे नाना नानी?
कैसे पंछी उडे गगन मे
और जमीन पर आते
मम्मी मुझे बताओ कैसे
पर्वत ऊँचे होते जाते?
डॉ अ किर्तिवर्धन
09911323732
शनिवार, 4 जुलाई 2009
मेरी कविता
मेरी कविता
मेरी कविता आँसू सम है
जो बिन नियम के चलते हैं
बस भावों को दर्शाते हैं
बिना कहे
शब्दों म कुछ भी
दिल के राज
बता जाते हैं.
आँसू
बस
भावों की अनुभूति हैं
स्वयं रंग
कैनवास और कूची है.
वाही भाव
जब शब्दों मे आते हैं
शब्द ही रंग
और कूची बन जाते हैं
मेरे पन्नों के कैनवास पर
कविता बनकर
छा जाते हैं.
शब्द स्वयं
कविता बन जाते हैं.
आ.कीर्तिवर्धन
मेरी कविता आँसू सम है
जो बिन नियम के चलते हैं
बस भावों को दर्शाते हैं
बिना कहे
शब्दों म कुछ भी
दिल के राज
बता जाते हैं.
आँसू
बस
भावों की अनुभूति हैं
स्वयं रंग
कैनवास और कूची है.
वाही भाव
जब शब्दों मे आते हैं
शब्द ही रंग
और कूची बन जाते हैं
मेरे पन्नों के कैनवास पर
कविता बनकर
छा जाते हैं.
शब्द स्वयं
कविता बन जाते हैं.
आ.कीर्तिवर्धन
मंगलवार, 23 जून 2009
मेरा गीत मुझे लौटा दो
तुम चाहती हो तुमको भूलूं
मैं भूलूंगा
मेरा गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा।
गाया था जो संग तुम्हारे
मधुर क्षणों मे,भंवरों के संग
गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा
तुम चाहती हो तुमको भूलूं
मैं भूलूंगा
मेरा गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा।
चंदा की वह मधुर चाँदनी
छत पर जा जब बातें की थी
चाँदनी मुझको लौटा दो
मैं जी लूँगा
तुम चाहती हो तुमको भूलूं
मैं भूलूंगा
मेरा गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा।
अमुवा की वह छावं घनी
पवन संग झुला झूले थे
मुझको लौटा दो
मैं जी लूंगा
तुम चाहती हो तुमको भूलूं
मैं भूलूंगा
मेरा गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा।
तन्हाई मे तिल-तिल जीना
और मिलन की इच्छा करना
पल मुझको लौटा दो
मैं जी लूंगा
तुम चाहती हो तुमको भूलूं
मैं भूलूंगा
मेरा गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा।
जारी है.
प्रस्तुतकर्ता a.kirtivardhan पर 9:37 AM 0 टिप्पणियाँ
मैं भूलूंगा
मेरा गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा।
गाया था जो संग तुम्हारे
मधुर क्षणों मे,भंवरों के संग
गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा
तुम चाहती हो तुमको भूलूं
मैं भूलूंगा
मेरा गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा।
चंदा की वह मधुर चाँदनी
छत पर जा जब बातें की थी
चाँदनी मुझको लौटा दो
मैं जी लूँगा
तुम चाहती हो तुमको भूलूं
मैं भूलूंगा
मेरा गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा।
अमुवा की वह छावं घनी
पवन संग झुला झूले थे
मुझको लौटा दो
मैं जी लूंगा
तुम चाहती हो तुमको भूलूं
मैं भूलूंगा
मेरा गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा।
तन्हाई मे तिल-तिल जीना
और मिलन की इच्छा करना
पल मुझको लौटा दो
मैं जी लूंगा
तुम चाहती हो तुमको भूलूं
मैं भूलूंगा
मेरा गीत मुझे लौटा दो
मैं जी लूँगा।
जारी है.
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रविवार, 7 जून 2009
अनुशासन
_____अनुशासन ____
माँ
नहीं पिलाती दूध
उस मासूम को
समय -बसमे
जब वह होता है
भूखा
और रोता है
दूध के लिए.
माँ
नहीं कराती उसे
स्तनपान
क्योंकि
डर है उसे
अपनी
देहयष्टि के
खराब होने का.
माँ
नहीं पिला सकती
दूध
वक़्त -बेवक्त
उस अबोध को
जो नहीं जानता
समय का महत्व
और
माँ की व्यस्तता .
हाँ
वह सीख जाता है
जन्म से ही
बोतल से दूध पीना
सिर्फ
और सिर्फ
निर्धारित समय पर.
डॉ अ किर्तिवर्धन
०९९११३२३७३२
माँ
नहीं पिलाती दूध
उस मासूम को
समय -बसमे
जब वह होता है
भूखा
और रोता है
दूध के लिए.
माँ
नहीं कराती उसे
स्तनपान
क्योंकि
डर है उसे
अपनी
देहयष्टि के
खराब होने का.
माँ
नहीं पिला सकती
दूध
वक़्त -बेवक्त
उस अबोध को
जो नहीं जानता
समय का महत्व
और
माँ की व्यस्तता .
हाँ
वह सीख जाता है
जन्म से ही
बोतल से दूध पीना
सिर्फ
और सिर्फ
निर्धारित समय पर.
डॉ अ किर्तिवर्धन
०९९११३२३७३२
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